संरक्षण एवंम् सुरक्षा


भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राँची अंचल द्वारा अधिनस्थ स्मारकों का हर साल संरक्षण का काम किया जाता है, जिसका संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है।

बेनीसागर जिला, प. सिंहभूम
बेनीसागर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का 1938-39 का घोषित संरक्षित स्मारक है, इसका परिसर लगभग 50 एकड़ का है। इसमें एक प्राचीन तालाब है। तालाब लगभग 10 एकड़ में है। तालाब के मध्य भाग में शिव मंदिर का वैज्ञानिक सफाई/उत्खनन् किया है तथा उसको संरक्षित किया है। आम जनता/पर्यटक को मंदिर तक जाने के लिए कच्चा रास्ता बनाया है। मंदिर के पश्चिम दिशा में वैज्ञानिक सफाई/उत्खनन् करके मंदिर एवं भवनों का संरक्षण किया है। तालाब के किनारो को संरक्षित करने के लिए चारो तरफ पत्थर का Support (Stone dry Pitching) दिया जा रहा है। चारो ओर सिमेन्ट का रोड बनाया गया है।

शिव मंदिर खेकपरता जिला-लोहरदगा
शिव मंदिर का निर्माण स्थानीय बलूआ पत्थर से किया गया है। इस मंदिर का कुछ भाग नष्ट हुआ था उसकी मरम्मत की गयी है। मंदिर परिसर को पत्थर एवं लोहे के बार से घेराबंदी की गई है। मंदिर की सिढ़ीयाँ तथा मंदिर के उपरी भाग चट्टानों को समतल करके उसे लोहे के बार से घेराबंदी की है। मंदिर के चारो और घूमने के लिए सिमेन्ट का रास्ता बनाया है। मंदिर के पश्चिम दिशा में वैज्ञानिक सफाई/उत्खनन् करके मंदिरों का संरक्षण किया गया है।

जामी मस्जीद, हदफ जिला, साहाबगंज
मस्जिद का निर्माण ईट, पत्थर, चूना एवं सूरकी से 16 वीं शताब्दी में किया गया है। मस्जिद की दिवारे, दरवाजे, आश्चेस तथा गुंवद को संरक्षित किया है।

बारादरी अरजीमुखीमपुर, जिला साहाबगंज
बारादरी का परिसर लगभग दो एकड़ का है यह गंगा जी के दाहीने तटपर स्थित है। गंगा जी के प्रवाह से बचाने के लिए बारादरी के पूरब, पश्चिम एवं उत्तारी भाग में पत्थर का सपोर्ट दिया गया है। बारादरी के दरवाजे एवं सेल को साफ सफाई करके संरक्षित किया गया है।