पटना अंचल कार्यालय द्वारा झारखण्ड स्थित ग्यारह संरक्षित स्मारक/स्थल की सूची, रांची अंचल को प्रेशित की गयी है, जो निम्नलिखित है।

क्रमांक

स्मारक के नाम

स्थान

जिला

अक्षांष

देषांतर

अवधि

1.

प्राचीन तालाब एवं मंदिर/भवन के अवषेश

बेनीसागर

पं. सिंहभूम

22°
85°

07’N
58’E

पाँचवीं शताब्दी
से मध्य काल

2.

शिव मंदिर

खेकपरना

लोहरदगा

23°
84°

21’N
44’E

मध्यकाल

3.

जामी मस्जिद

हदफ

साहाबगंज

25°
87°

23’N
59’E

मध्यकाल

4.

बारादरी

टजीम उखीपपूर

साहाबगंज

25°
87°

03’N
59’E

मध्यकाल

5.

असूरा साईट

कूंजला

खूँटी

23°
85°

03’N
05’E

इतिहास काल

6.

असूरा साईट

खूँटी टोला

खूँटी

23°
85°

03’N
17’E

इतिहास काल

7.

असूरा साईट

सारीदकल

खूँटी

23°
85°

01’N
13”E

इतिहास काल

8.

असूरा साईट

कथारटोली

खूँटी

23°
85°

03’N
11’E

इतिहास काल

9.

असूरा साईट

हंसा

खूँटी

23°
85°

09’N
17’E

इतिहास काल

10.

प्राचीन भग्नावषेश एवं किला

रूआम

पू. सिंहभूम

22°
85°

38’N
55’E

इतिहास काल

11.

प्राचीन टिल्हा  (स्थानीय लोक कूलूगृह बासपूर के नाम से जानते हैं।)

इयागढ़

सराई केला

23°
85°

05’N
55’E

इतिहास काल

12.

हराडीह मंदिर समूह के भग्नावषेश

हराडीह

राँची 

 230 08'47" N

 850 41'39"

पूर्वा मध्य काल


   

जामी मस्जिद



Before Conservation

After Conservation

जामी मस्जिद का निर्माण सोलहवीं सदी के उत्तारार्ध्द में राजा मानसिंह के द्वारा करवाया गया था, जो सम्राट अकबर के राज्यपाल थे। यह मस्जिद एक ऊँचे स्थल पर स्थित है, जिसे 'हृदफ' के नाम से जाना जाता है। हृदफ एक अरबी षब्द है जिसका अर्थ होता है लक्ष्य अथवा धनुष-बान का निषाना। यह एतिहासीक राजमहल नगरीय क्षेत्र का हिस्सा था जहाँ 1592 ई. में गंगा नदी के प्रवाह के बदलाव के कारण गौड़ में सन् 1575 ई. में फैली महामारी भी थी।

इस मस्जिद को स्थानीय तौर पर जामी मस्जिद भी कहते हैं, इसमें एक विषाल प्रार्थना कक्ष है, जो पष्चिम की ओर स्थित है। इसके अंदर एक बड़ा आंगन है ऊँचे अहाते से घिरा हुआ है, जिसमें मेहराबदार ताखे भीतर की ओर निर्मित हैं। मस्जिद में तीन द्वार है। जो उत्तार, दक्षिण और पूर्व दिशा की ओर है। पूवी दिषा का द्वार मुख्य द्वार है, जिसके सामने डयोढ़ी बनी हुई है। वास्तव में सम्पूर्ण भवन का माप 76.2x64 मीटर था, परन्तु वर्तमान में केवल इसका दक्षिणी भाग ही बचा है। जिसकी लम्बाई 77.43 मीटर और चौड़ाई 13.71 मीटर है।

मस्जिद का उत्तारी हिस्सा पूर्णत: ढह गया है। मस्जिद का प्रार्थना कक्ष एक विशाल केन्द्रीय हॉल है, जो बाहर से देखने में दो मंजिला प्रतीत होता है यह ऐसा इसलिए है क्योंकि उसमें बनी हुई विशाल खिड़कियाँ और उनके नीचे निरन्तर बने हुए मुंडेर इस बात का आभास देते हैं, कि यह दो मंजिला इमारत है। प्रार्थना कक्ष के पश्चिमी दिवार पर कई ताखें बने हुए हैं, जिसमें प्रस्तर से कुछ पुश्प आकृतियाँ बनायी गई है।

बारादरी


बारादरी को नागेश्वर बाग के नाम से भी जाना जाता है। इसके निर्माता के नाम पर विवाद है। कुछ विद्वान राजा मान सिंह (1592 ई. के उपरान्त) के प्रतिद्वंदी फतेह जंग खान को इस भवन का निर्माता मानते हैं, जबकि अन्य इसके निर्माण का श्रेय बंगाल के नवाब मीर कासिम अली खान (1763 ई. के पूर्व) को देते है।

एक ऊँचे स्थल पर निर्मित यह भवन 18.10 x 16.25 मीटर (लगभग 295 वर्ग मीटर) के माप के चबूतरे पर बना है, जिसकी दिवार की ऊँचाई लगभग 9 मीटर थी। वर्तमान में 5 मीटर ऊँची दिवार का अवशेष ही बचा है। प्राकार के एक कोने पर सुरक्षा कोष्ठकों से युक्त एक प्रवेशद्वार है। दिवार के भीतरी भाग में महिलाओं और उनकी परिचारिकाओं के लिए कमरों की पंक्ति बनी हुई थी, जिनके सामने खुला ऑंगन था। प्रत्येक कमरे के सामने एक सामान्य मेहराबदार गलियारा था जिसका मुँह भीतरी ऑंगन में खुलता था। कहा जाता है कि ऑंगन के मध्य में मुख्य रूप से लकड़ी का बना एक वर्गाकार भवन था, जिसे रंगमहल कहते थे। वर्तमान में रंगमहल का कोई भी अवशेष नहीं बचा हैं।

प्राकार के बाहर एवं प्रहरियों के लिये वाह्य-गृहों अथवा ओसारों की व्यवस्था थी। सन् 1820 ई. में बुकानन नामक विदेषी विद्वान ने इस स्थल का भ्रमण किया था तथा इस भवन को पूर्णतया जीर्णोवस्था में पाया था, क्योंकि इसकी छत की लकड़ियाँ राजमहल में नवाब रूकुनदौला के मकान को बनाने के लिए निकाल ली गयी थी।

खेकपरता का प्राचीन शिव मंदिर



Before Conservation


After Conservation

स्थानीय पत्थरों से निर्मित यह 'शिव मंदिर' खेकपरता गाँव के निकट छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण बिना नींव खोदे, सीधे पहाड़ी के उपरी सतह पर किया गया है। मन्दिर में एक मीटर ऊँचाई का एक संकरा द्वारा है, जो पुर्वाभिमुख है। गर्भगृह के अन्दर एक शिव लिंग स्थापित है। मंदिर के शिखर पर एक आमलक है। इस मंदिर की ऊँचाई लगभग चार मीटर है। निर्माण शैली के आधार पर यह मंदिर उड़ीसा के देउल मंदिरो की तरह ही है, जो मध्यकाल में निर्मित हुए थे। हाल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने वैज्ञानिक सफाई/उत्खनन के द्वारा पहाड़ी की तलहटी में मंदिरों के समूह को प्रकाश में लाने का कार्य किया है, जिसमें सभी मन्दिर (एक को छोड़कर) भगवान शिव को समर्पित है,क्योंकिइनसभीमेंशिवलिंगस्थापितहै।


बेनीसागर



Before Conservation

After Conservation

बेनीसागर/बेनूसागर, बेनू राजा के नाम से जाना जाता है, बेनू राजा ने विशाल तालाब का निर्माण किया था। तालाब का परिमाप लगभग 300 x 340 मीटर का है। तालाब का प्रथम निरीक्षण कोलेनेल टिकेल ने ई. सन् 1840 में किया था। श्रीमान बेगलर ने 1875 में इस स्थल का निरीक्षण किया। भग्नावशेष के आधार पर स्थल की तिथि सातवीं शाताब्दी तक रखी गयी है। स्थानीय परंपरा के अनुसार तालाब का निर्माण बेनू राजा ने किया था, किंतु पुरातात्विक दृष्टिकोण से अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिला कि तालाब का निर्माण वास्तव में किसने किया।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने हाल ही में तालाब के पूर्व-पश्चिम एवंम बांध के पूर्व में लगभग 100 मीटर दूरी पर उत्खनन किया। दो मंदिर इमारत एवंम मूर्तियों के अवशेष काफी मात्रा में मिले हैं, जिनमें सूर्य, अगनी, लकूलेस कुबेर आदि की मूर्तियाँ हैं। पत्थर की मुहर में शिलालेख ''प्रियनगू धेयम् चतुरविद्या'' है प्रियनगू का नाम चारों वेदों में प्रवीण जैसा है। शिलालेख में ब्राम्ही की लिखावट और भाषा संस्कृत है,जोपाँचवीसदीकीहोसकतीहै।

उपरोक्त प्राप्तों के अनुसार इस स्थल पर पाँचवी सदी से सोलहवी,सत्रहवींशताब्दीमेंलोगोंकावर्चस्वरहाहै।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राँची अंचल द्वारा झारखण्ड स्थित अन्य ऐतिहासिक खोज की गई है, तथा उनका बारा धरोहर घोषित करने के लिए महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली को भेजा गया है। जिसकी सूची निम्न प्रकार है।


क्रमांक

स्मारक के नाम

स्थान

जिला

अवधि

1.

दो मस्जिद (Twin Mosque)

इमलीबरी

साहिबगंज

मध्य काल

2.

जैणाबाद मस्जिद

रामजहल

साहिबगंज

मध्य काल

3.

जगतसेठ का टकसाल

रामजहल

साहिबगंज

मध्य काल

4.

मिर्जा मोहम्मद का मकबरा

रामजहल

साहिबगंज

मध्य काल

5.

मैना बीबी का मकबरा एवं तालाब

रामजहल

साहिबगंज

मध्य काल

6.

बिरसा मूंडा, कारागृह

राँची

राँची

18 वीं शताब्दी

7.

तेलीयागढ़ का किला

रामजहल

साहिबगंज

मध्य काल

8.

हराडीह मंदिर समूह के भग्नावषेश

तमाड़

राँची

इतिहास काल

9.

षाहपुर का किला

डाल्टेनगंज

पलामू

मध्य काल

10.

नवरतनगढ़ का किला एवं मंदिर समूह

गूमला

गूमला

मध्य काल

11.

टैगोर हिल

राँची

राँची

19 वीं शताब्दी

12.

कैयथा मंदिर

रामगढ़

रामगढ़

मध्यकाल


कैयथा मंदिर, रामगढ़ का Preliminary Notifications हुआ है।